नींद में गुलाब ++++++++ पश्चिम की तरफ सरकते सूरज की रौशनी में तीनों सुनहरे हो रहे थे | बालकनी के गुलाब , लड़की के सर के चांदी के तार और दीवार पर गुलाबों की एक पेंटिंग | लड़की और गुलाब इस वक्त एकसार हो चुके थे | बालकनी में घर के बहुत से सामानो के बीच कई रंगो के गुलबों के गमले थे जिसमे खिलते गुलाब को देखते हुए लड़की के चेहरे पर मुस्कान खिल जाती थी और उसे हर एक गुलाब में एक गार्डन नज़र आने लगता था | वो स्कूल में याद किया ‘गार्डनिंग-माय हॉबी’ की पहली से लेकर अंतिम लाइन तक अपने भीतर बुदबुदाने लगतीं | हर लाइन के साथ वे उम्र की सीढियां उतरने लगतीं | और अपने बचपन के आँगन में जा पहुँचती | जहां सालीवाड़ा बस्तर में पिता फारेस्ट गार्ड थे | आंवला अमरुद इमली के पेड़ों के साथ गुलाब का एक छोटा सा बागीचा था | उस बागीचे में खेलते हुए एक लड़की सोचा करती कि दुनिया को एक गुलाब का बागीचा होना चाहिये | लड़की स्कूल में पढ़ती तो कक्षा के बाहर खिले गुलाब को देखती और सब सबक भूलकर सिर्फ इतना याद रख पाती दुनिया को गुलाब का बागीचा होना चाहिये | लड़की जब बड़ी हुई और ...
कथ्य,शिल्पऔर अंतर्निहित सन्देश तीनों ही दृष्टि से अकिंचन ,जीवित फिर भी त्रणवत