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दुम और जंगल

सूक्ष्म कथा : दुम और जंगल; 
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१) दुम
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मै दम लाने के चक्कर में दुम काट दिया करता था|
' लेकिन हमें हिलती हुई दुम पसंद है'
मेरी रचनाओ के पढ़ने के बाद कड़वा सा मुंह बनाते हुए सम्पादक महोदय में प्रकाशक की ओर ठेल दिया |
प्रकाशक पान की पीक के साथ उन पर कुछ थूकने जा ही रहे थे कि मैं उन्हें समेटकर तेज़ी से उठा |
उतनी ही तेज़ी से "वे" अन्दर आये और अपने झोले से लम्बी दुमो को निकालकर टेबल पर उनके सामने फैलाकर बैठ गये |
कुछ सालों बाद "वे" सम्पादक की कुर्सी पर विराजमान थे |||

२)जंगल
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उनके शहर जाना हुआ |
वे बोले ' चलिये आज जंगल पिकनिक कर आते हैं |'
घंटो कार से भटकने के बाद शहर के मुख्यमार्ग से हटकर झाड़ियों की आड़ थी जिसे शायद आसपास केगाँव वालों ने दिव्यनिपटान के लिए बचा कर रखा होगा |
हम वहां अपने साथ ले जाये गये टिफिन खाली करके सेल्फी लेकर लौट आये |
रात उनके घर डिनर पर जाना हुआ|
तीन लोंगो के लिए ६ बेडरूम के उस घर में दरवाजे खिड़की फलोरिंग बेड ड्रेसिंग डाइनिंग काउच सोफा सब का सब शानदार वुडन क्राफ्ट था | जिसकी खासियत वे गर्व से दिखाते हुए बताते जा रहे थे |
"हम लोग दिनभर नाहक जंगल केलिए भटके..जंगल तो यहाँ आ गया है |"
मैंने मुस्कुराते हुए कहा |
मेरे साथ वे भी मुस्कुरा दिये ||

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