Skip to main content

yoga हवाबाण

yoga हवा बाण
 _______________________________
'yoga हवा बाण' हमारे इंटर नेशनल ब्रांड हैं |
बैलगाड़ी से रेलगाड़ी , वायुयान से जल यान , हवा-पानी - धरा -आकाश वे सर्वत्र हमें विश्व गुरु बनाने की विश्व विजय यात्रा के अश्व मेधी घोड़े हैं |
राष्ट्र के गिरते स्वास्थ्य और बिगड़ते चरित्र को वे एक डोज से ठीक करने निकले हैं
yoga हवा बाण हर मर्ज़ की एक दवा है |
बेडरूम में तनाव हो या बार्डर पर |
भ्रष्टाचार हो ,व्याभिचार हो ,बलात्कार हो , दंगा-फसाद हो , भुखमरी -कालाबाजार हो , मरता किसान हो ,परेशान इंसान हो , बस्तर-कश्मीर हो , सियाचीन -फिलिस्तीन हो , ओबामा हो -ओसामा हो ,डोनाल्ड या रोनाल्ड हो बस हवा खींचो हवा छोड़ो ..सब ठीक होगा चिंता छोड़ो |
तो yoga हवाबाण की कहानी बड़ी दिलचस्प है |
लापता भैंस जो ढूंढते -ढूंढते वे हिमालय के दुर्गम हिम शिखर पर जा पहुंचे वहां उन्हें भैंस तो नहीं मिली अलबत्ता yoga हवाबाण जरुर मिला जिसे वे कच्छे में बांधकर तेज़ी से वापस लौटे और कुकरमुत्ते की तरह देश के कोने कोने में yoga हवा बाण की फ्रेंचाइजी ऊग आयी | देखते-देखते उनके इस लिमटेड कारोबार में अनलिमिटेड मुनाफा बरसने लगा |
आज yoga हवाबाण का जन्म दिन था | आज yoga हवाबाण आन लाइन समस्या का समाधान करने वाले थे |
पहले नेता फिर अभिनेता ने yoga हवा बाण किया फिर पीछे पीछे जनता ने |
मै टीवी पर सांस रोक कर लाइव देख रहा था |
किस्मत से मेरी ही कॉल लग गयी |
मैंने रोमांच अश्रु के बीच अपनी बात शुरू करते हुए कहा " आपके स्वच्छ भारत की डोर टू डोर कचरा गाडी ने वाट लगा दी है | वे कई कई दिन नहीं आते | हमारे घर के सामने कचरे का ढेर हमारी स्वर्गसोसाइटी को नरक में बदल रहा है | दुर्गन्ध के मारे सांस लेना दूभर है |" आगे कुछ कहता कि लाइन कट गयी |
yoga हवा बाण ने हल्के से अट्टहास किया फिर कहा अब चमत्कार देखिये
और बोलना शुरू किया ' आराम से बैठ जाइए ...आँख बंद करिये ...अब नाक बंद करिये ..अब मुंह से धीरे धीरे सांस लीजिये ..कहिये अब कहीं कचरा दिखाई दे रहा है '
सबने उद्घोष किया " नही ...नहीं दिखाई दे रहा "
फिर उन्होंने कहा ..अब धीरेधीरे शव आसन में आ जाइए |
शव आसन में रहते हुए मुझे देव वाणी सुनाई दी
" स्वर्ग सोसाइटी में तुम या तो शतुरमुर्ग होकर सुखी रह सकते हो या शव होकर "...||

Comments

Popular posts from this blog

सिल-बट्टा

कथा : सिल-बट्टा ... ++++++++++++++++++ दादी सास मरी तो उनका लकड़ी का सन्दूक पलंग के नीचे से बाहर निकाला गया | कभी पूरी हवेली उनकी तर्जनी पर नाचती थी | फिर वे एक कमरे तक सिमटती गयीं और फिर पलंग ही उनका संसार हो गया था | उन्होंने शरीर के जेवर उतारकर बहुओं में बाँट दिये थे | कभी बेटी-दामाद आते तो दादी पलंग के नीचे से सन्दूक निकालने को कहती और एक कपडे की गाँठ खोलकर नोट निकालती और आशीष देते हुए थमा देती  | उस गाँठ में वापस नोट कहाँ से आ जाते थे यह राज दादी सास के साथ ही .... दादी सास के संदूक को खोलकर नाती पोतों ने उसकी रहस्य भरी दुनिया में झाँका ..उनके कपड़े ..कपड़ों के नीचे कुछ देवी देवताओं की तस्वीर और उनके बीच एक बहुत पुराना लगभग गल चुका गमछा ... और सबसे नीचे .. सिल-बट्टा ...| सिल-बट्टा का निकलना था कि लगा दादी सास का भूत निकल आया हो | कहते है यह दादी सास की दादी सास के समय से था | नयी बहु आती तो इसकी पूजा करायी जाती | धोखे से पाँव लग जाता तो प्रणाम करने होते | दाल पीसनी हो या चटनी ...ये महाराज धों पोंछकर बिछाये जाते और फिर वैसे ही धो पोछकर दीवार के सहारे टिका दिये जाते | जब मिक्सी-ग्...

लप्रेक :टुरा और टुरी

टुरा और टुरी : लप्रेक ***************** १)पूर्वार्ध ^^^^^^^^ कहते है जमीन और आसमान सिर्फ मिलते हुए दिखते हैं ,हक़ीक़त में मिलते कभी नही । तो एक ऐसी ही जगह जहां ज़मीन और आसमान मिलते दिख रहे थे एक टुरी खड़ी थी । उसके जूड़े में फूल था । उसकी अँजुरी में फूल थे उसकी साँसों में फूल थे उसकी आँखों मे फूल थे वो उस तरफ देख रही थी जिस तरफ से एक टुरा आता दिख रहा था । दिख रहा था ...बस ..आ नही रहा था । टुरा अचानक दूसरी गली में मुड़ गया । इस स्टोर से उस स्टोर इस बिल्डिंग से उस बिल्डिंग उसकी जेब मे एक लंबी लिस्ट थी लिस्ट बड़ी मंहगी थी और वह बेहद जल्दी में था । टुरी खड़े खड़े ऊँघने लगी टुरा भागते भागते बहुत दूर निकल गया । २)उत्तरार्ध ^^^^^^^^^^^^ टुरा बड़ा होकर 'ही' बना । 'ही' बड़ा आदमी बना । टुरी बड़ी होकर 'शी' बनी । 'शी' लेखिका  बनी । 'शी'को अब भी विश्वास था कि ज़मीन और आसमान का मिलना स्वप्न नही सच है । सो उसने टिकट कटाया और मुम्बई जा पहुंची । 'ही' मिला जरूर लेकिन  लंबी गाड़ी ऊंचे बंगले और मोटे  बैंक बैलेंस के नीचे दबकर उसका चेहरा वीभत्स हो ...

कीड़ा और अमन के रखवाले

कीड़ा _______________ बिटिया जोर से चिल्लाई ..'पापा ...' | मै लपक कर पहुंचा तो गमले के पास डरी खड़ी थी | उसने अंगुली का इशारा किया तो मैंने देखा एक जहरीला सा दिखता कीड़ा गमले के पीछा छिपा था | उसे भगाना चाहा तो वो स्कूटर के पीछे जा छिपा , वहां से खदेड़ा तो जूतों के रेक के पीछे जा छिपा | अंत में तय किया गया कि इससे पीछा छुड़ाने के लिए इसे मार ही डाला जाये | जिस क्षण उसके सर को मै डंडे से कुचलने जा ही रहा था | ठीक उसी क्षण वहां यक्ष खड़ा हो गया | यक्ष ने कहा " बेशक उसे मार डालो लेकिन पहले एक प्रश्न का जवाब दो क्या तुम उन जहरीले कीड़ो को भी ढूंढकर मार सकते हो जो कानून , धर्म , राष्ट्र , संस्कृति की आड़ में छिपे हैं ?" मै निरुत्तर था | अब वहाँ ना यक्ष था ना कीड़ा || अमन के रखवाले  ___________________________ उस गिरोह का दावा था कि वो अमन का  रखवाला  है | चौराहों पर उनके बड़े-बड़े इश्तहार चिपके थे जिनमे में अत्याधुनिक हथियारों से सुसज्जित अमन की अपील के साथ खड़े दिखते थे | एक दिन दोपहर को सूरज डूब गया | खबर आयी कि उन्होंने शहर के उस नंगे फ़कीर को गोली मार दी जो ग...