सूक्ष्म कथा : पैथालोजिकल पोस्टमार्टम
( ‘कफ़न’ को याद करते हुये )
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“हम लोगों आखिर हार गये थे | दो हफ्तों से , बेड नबर १७ के मरीज को हमारे डीन पैथालोजिकल अध्ययन के रूप खुद देख रहे थे | सारी दवाइयां उस बच्ची के सिकुड़े लीवर को आकार में नहीं ला सकी थी | जब हमने उसे मरा घोषित किया तो उसके साथ आयी उसकी माँ और नानी के चेहरों पर दुःख और राहत एक साथ दिखी | वे उड़िया लेबर थे जो शहर के ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए ठेके पर लाये गये थे | शायद अब वे अपनी रोज़ी पर वापस लौट सकती थीं |वे हमारे देखते देखते बॉडी को लेकर बाहर निकल गये |
लेकिन डीन को जैसे ही खबर हुई वे उबल पड़े कि बॉडी को जाने कैसे दिया ?उसको रोको उसका पैथालोजिकल पोस्टमार्टम केस को समझने के लिए जरूरी है |
हमने उल्टे पाँव बॉडी के लिये दौड़ लगायी वे लोग मेन गेट के बाहर ही मिल गये | माँ तो कुछ नहीं बोली लेकिन नानी अड़ गयी कि ‘बेटी अपनी मौत मरी है ..उसे चीर फाड़ नहीं होने दूँगी.तुम लोग उसका गुर्दा कलेजी सब निकाल लोगो|’..
उसकी अड़ी पर देखते देखते मजमा जमा हो गया और बॉडी को वापस पाना मुश्किल हो गया |
अंत में अस्पताल के स्वीपर की अक्ल काम आयी उसने नानी को किनारे ले जाकर समझाया कि यदि बॉडी टेस्ट के लिए दान कर दोगी तो स्कीम के तहत पैसा मिलेगा | अंत में तीन सौ पर सौदा तय हुआ |जो वहीँ पर उन्हें दे दिये गये |
मर्चरी से जब हम वापस जा रहे थे तो हमने देखा कि माँ और नानी दोनों अंडे के ठेले पर खड़ी थी | माँ ने अंडे की पहली फाँक किसी तरह हलक के नीचे उतारी लेकिन दूसरी फाँक के मुह में रखते ही हिचकी लेकर रोते हुये जमीन पर बैठ गयी | नानी ने अपना अधखाया अंडा किनारे रखा और उसकी पीठ मलने लगी.. हमने अपने अपने अंडे बंधवाये और सामने की दूकान से अपना ब्रांड लेकर हास्टल की तरफ मुड गये |”
डाक्टर श्रीधरन ने आख़री घूँट के साथ कहानी खत्म की ..
“साला तुम हर बार ऐसी झूठी इमोशनल स्टोरी को सुना कर नशा खराब कर देता है|” एडीशनल साहब ने जोर से टेबल पर गिलास दे मारा ..|
“झूठी ..???दो दिन निवाला हलक से नीचे ना उतरे तो सब कहानी सच्ची लगने लगेगी|” चिल्लाते हुये डाक्टर श्रीधरन पार्टी से निकल गये ..और कुछ देर बाद पार्टी खत्म हो गयी ||||||
face book 11/8/2014
( ‘कफ़न’ को याद करते हुये )
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“हम लोगों आखिर हार गये थे | दो हफ्तों से , बेड नबर १७ के मरीज को हमारे डीन पैथालोजिकल अध्ययन के रूप खुद देख रहे थे | सारी दवाइयां उस बच्ची के सिकुड़े लीवर को आकार में नहीं ला सकी थी | जब हमने उसे मरा घोषित किया तो उसके साथ आयी उसकी माँ और नानी के चेहरों पर दुःख और राहत एक साथ दिखी | वे उड़िया लेबर थे जो शहर के ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए ठेके पर लाये गये थे | शायद अब वे अपनी रोज़ी पर वापस लौट सकती थीं |वे हमारे देखते देखते बॉडी को लेकर बाहर निकल गये |
लेकिन डीन को जैसे ही खबर हुई वे उबल पड़े कि बॉडी को जाने कैसे दिया ?उसको रोको उसका पैथालोजिकल पोस्टमार्टम केस को समझने के लिए जरूरी है |
हमने उल्टे पाँव बॉडी के लिये दौड़ लगायी वे लोग मेन गेट के बाहर ही मिल गये | माँ तो कुछ नहीं बोली लेकिन नानी अड़ गयी कि ‘बेटी अपनी मौत मरी है ..उसे चीर फाड़ नहीं होने दूँगी.तुम लोग उसका गुर्दा कलेजी सब निकाल लोगो|’..
उसकी अड़ी पर देखते देखते मजमा जमा हो गया और बॉडी को वापस पाना मुश्किल हो गया |
अंत में अस्पताल के स्वीपर की अक्ल काम आयी उसने नानी को किनारे ले जाकर समझाया कि यदि बॉडी टेस्ट के लिए दान कर दोगी तो स्कीम के तहत पैसा मिलेगा | अंत में तीन सौ पर सौदा तय हुआ |जो वहीँ पर उन्हें दे दिये गये |
मर्चरी से जब हम वापस जा रहे थे तो हमने देखा कि माँ और नानी दोनों अंडे के ठेले पर खड़ी थी | माँ ने अंडे की पहली फाँक किसी तरह हलक के नीचे उतारी लेकिन दूसरी फाँक के मुह में रखते ही हिचकी लेकर रोते हुये जमीन पर बैठ गयी | नानी ने अपना अधखाया अंडा किनारे रखा और उसकी पीठ मलने लगी.. हमने अपने अपने अंडे बंधवाये और सामने की दूकान से अपना ब्रांड लेकर हास्टल की तरफ मुड गये |”
डाक्टर श्रीधरन ने आख़री घूँट के साथ कहानी खत्म की ..
“साला तुम हर बार ऐसी झूठी इमोशनल स्टोरी को सुना कर नशा खराब कर देता है|” एडीशनल साहब ने जोर से टेबल पर गिलास दे मारा ..|
“झूठी ..???दो दिन निवाला हलक से नीचे ना उतरे तो सब कहानी सच्ची लगने लगेगी|” चिल्लाते हुये डाक्टर श्रीधरन पार्टी से निकल गये ..और कुछ देर बाद पार्टी खत्म हो गयी ||||||
face book 11/8/2014
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