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सफेदा (drug abuse )

सूक्ष्म कथा : सफेदा 
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प्लेटफॉर्म नम्बर ४ की सीढ़ी पर भीड़ जमा थी | बीच में एक हवलदार लाश का पंचनामा बना रहा था | मैंने भी भीड़ के भीतर सर डाला तो देखा कि एक १० – १२ बरस का बच्चा होगा ...मरियल और मैला सा .. शर्ट और पेंट उम्र से बड़े और फटे .. मुठ्ठी में एक रुमाल भिंचा था मानो उसे भींचकर सो गया हो.... हवलदार बडबडा रहा था “इसकी **** नशेड़ी था ..भो***...दिन का नाश कर दिया स्याले ने ..” मैंने गौर से देखा.. ....अरे ये तो ‘वो’ ही था |
‘वो’ मुझे कई दिनों से लगातार मिल रहा था | इंटर सिटी में घुसता और शर्ट उतारकर फर्श साफ़ करने लगता और फिर भीख मांगता | मुझे लगा यह अच्छा केस मटेरियल हो सकता है,सो मैं धीरे धीरे उससे खुलने लगा| एक बार मैंने टिफिन खोलकर पराठा बढ़ाया तो उसने पहले ना की ... फिर अपनी जेब में रख लिया ..बोला बाद में खायेगा ... फिर टूटा हाथ दिखाते हुये कहा कि यदि अभी खाया तो ‘खली’ दूसरा हाथ भी तोड़ देगा | खली कहता है कि मरियल या अपाहिज को ही भीख मिलती है | अगली दफे मैंने उसे ५ का सिक्का दिया | एक बार १० का सिक्का दिखाकर पूछा इसका क्या खरीदोगे ?
“सफेदा”..उसने कहा
“क्यों ?”
“उसे सूंघकर कुछ भी ना खाओ तब भी अच्छी नींद आती है” ...
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“सफेदा”... मेरे भीतर गूंजा |
नजर दौड़ायी तो फर्श पर “व्हाईटनर” की शीशी पड़ी थी |
अचानक ट्रेन का हार्न सुनायी दिया ...मै लपककर ट्रेन में चढ़ गया |
ट्रेन प्लेटफार्म छोड़ चुकी थी ..बाहर झाँका तो नारा लिखा था ..
'गर्व करो तुम ##### ..'
मुझे लगा मैंने 'सफेदा' सूंघ लिया है ....
मैंने मूर्छा में नारा पूरा किया ...“कुत्ते हो” .... ||||


15/ 8 /2014 

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