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सट्टे पे सट्टा

सट्टे पे सट्टा :सूक्ष्म कथायें
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(सट्टा १ :पपलू )
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तीन पत्ती पर पब में एल ई डी के आगे हुजूम लगा था |
... “क्या लगता है.. अगली बाल पे छक्का पड़ेगा ....?”
“नहीं ...”
“लगी एक एक बियर की”
“ओके डन ...”
...........३ घंटे बाद .....
सडक पर एक पोस्टर को जूते से कुचलते हुए वे दोनों बडबडा रहे थे ..
“स्याला नशे का नाश कर दिया ...खेल से गद्दारी करता है ..” |
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(सट्टा २ :किंग )
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शाम फोन पर ..
‘मेंगो का रेट बोलो’
“तीन का पांच”..
‘ओरेंज ?’
“४ का ९”
‘तीन पेटी मेंगो...’
“ओके एमाउंट ब्लू हेवन में”
.............रात दस बजे ......
फोन पर लड़खड़ाती आवाज आती है..
“..एमाउंट आधा करो टाइगर भाई श्याल्ल्ला खिलाड़ी बिक गया है...ऐसे में धंधा कैसे होयेगा .. ..श्याल्ल्ल्ला बेईमान”
‘कुमार साहब ..एमाउंट तो बंट गया,, सॉरी अपने धंधे में कोई रीप्ले नहीं चलता ’
और झटके से काल कट जाती है ||
 

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