सूक्ष्म कथा :
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हम दोनों एक ही बेंच पर बैठे थे |
हालांकि मुझे अप लाइन की ट्रेन का इंतज़ार था और उसे डाउन लाइन की |
हमारे चारो और मक्खियाँ भिनभिना रही थी | वे किसके इंतज़ार में थी कह नहीं सकता |
... सामने मुसलसल बारिश थी जिसके रुकने का इंतज़ार शायद सभी को था |
“ सोयाबीन खराब हो जायेगी ” उसने बारिश को देखकर कहा ..
“ बिटिया लौटते में शायद भीग जाये ” मैंने कहा ..
फिर हमारी बातों की रेल गाँव , घर , शहर , दिल्ली ,महंगाई ,बीमारी ना जाने कहाँ कहाँ दौड़ने लगी और अचार पर आकर रुक गयी |
उसने बेग से टिफिन निकाला और सामने धरते हुये कहा ...लीजिये घर के आम का है |
मैंने भी मुस्कुराकर अपना लड्डू वाला डब्बा आगे बढ़ाया ...लीजिये माँ ने जिद करके रख दिये हैं |
फिर हम दोनों एक साथ मुस्कुराये ...
हमारे इंतज़ार के पेड़ पर फूल खिल रहे थे ....||||
(चित्र गूगल साभार )
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हम दोनों एक ही बेंच पर बैठे थे |
हालांकि मुझे अप लाइन की ट्रेन का इंतज़ार था और उसे डाउन लाइन की |
हमारे चारो और मक्खियाँ भिनभिना रही थी | वे किसके इंतज़ार में थी कह नहीं सकता |
... सामने मुसलसल बारिश थी जिसके रुकने का इंतज़ार शायद सभी को था |
“ सोयाबीन खराब हो जायेगी ” उसने बारिश को देखकर कहा ..
“ बिटिया लौटते में शायद भीग जाये ” मैंने कहा ..
फिर हमारी बातों की रेल गाँव , घर , शहर , दिल्ली ,महंगाई ,बीमारी ना जाने कहाँ कहाँ दौड़ने लगी और अचार पर आकर रुक गयी |
उसने बेग से टिफिन निकाला और सामने धरते हुये कहा ...लीजिये घर के आम का है |
मैंने भी मुस्कुराकर अपना लड्डू वाला डब्बा आगे बढ़ाया ...लीजिये माँ ने जिद करके रख दिये हैं |
फिर हम दोनों एक साथ मुस्कुराये ...
हमारे इंतज़ार के पेड़ पर फूल खिल रहे थे ....||||
(चित्र गूगल साभार )

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