सूक्ष्म कथा : हिसाब (हमने अपनी क्रूरताओं को खूबसूरत लिबास पहना रखा है )
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काली कुरती वाले ने पीली कुरती वाले को रोका और दो लात लगाकर चीखा.. “ तुम्हारे बाप ने मेरे बाप को गाली दी थी ...आज हिसाब सूद समेत बराबर |”
(एक और पीढ़ी बाद......)
पीली कुरती वाला घुड़सवार , काली कुरती वाले को बर्छी घोंप कर नाचने लगा ... “ तुम्हारे बाप ने मेरे बाप को मारा था.. ...आज हिसाब सूद समेत बराबर |”
(कुछ और पीढ़ियों बाद ..)
नारे लगाते हुआ हुजूम ...बस्ती में घुसा | औरतों के साथ बलात्कार किये ...बच्चो को संगीनो पर उछाला... और अट्टहास कर बोला “...आज हिसाब सूद समेत बराबर |”
ये देख...बूढ़ा आसमान छाती पीटकर विलाप करने लगा .. “ हाय हाय ..ये कौन सा हिसाब है जो मासूमो ,मजबूरों और बेकसूरों की कीमत पर बराबर किया जा रहा ..|”
बूढ़े आसमान का विलाप अब भी अनसुना है |||
( चित्र साभार गूगल)
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