कालाधन
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उनका यह अटूट विश्वास था कि उन्हें हर कार्य के लिए देवीय प्रेरणा प्राप्त होती है |
हालांकि उनके सिवाय किसी और ने इसका समर्थन नहीं और किया तो खंडन भी नहीं |
इसलिए शून्य के विरुद्ध एक मत से उनका दावा सिद्ध होता है |
तो उन्होंने उसी देवीय प्रेरणा से कमीशन की एक एक पाई जोड़कर करोड़ो रूपये इकट्ठा कर लिए |
अब चूंकि यह देवीय प्रेरणा से संचित धन था इसलिए इस पर किसी सरकार को टेक्स देना उन्हें गंवारा ना था |
जब कोई उनके इस देवीय धन को काला धन कहता तो वे पहले इस धन को देखकर तसल्ली करते कि यह काला नहीं हरा है और फिर काला धन कहने वाले की सात पुश्तों के साथ मुंह काला करने लगते |
एक दिन जब सरकार ने ऐलान कर दिया कि कल से ऐसा सारा धन राज्य में अप्रचलनीय हो जायेगा | ऐलान सुनकर पहले तो वे मरते मरते बचे किन्तु होश में आते ही उन्हें देवीय प्रेरणा प्राप्त हुई कि देवता सरकार से बड़ा है जो धन सरकार अस्वीकार कर दे उसे देवता फिर भी ग्रहण कर सकता है |
उन्होंने झट से दीवार और जमीन फाड़ कर ऐसा सब धन बोरो में भरा और देवता को समर्पित कर दिया |
लौटते हुए देवता उन्हें सोने की सौ कुल्हाड़ियाँ प्रसाद स्वरूप भेंट की |
अब वे चैन से सो रहे थे |
अब इस धन को कोई काला धन नहीं कह सकता था सरकार तक उसे सुनहरा धन कह रही थी ||
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उनका यह अटूट विश्वास था कि उन्हें हर कार्य के लिए देवीय प्रेरणा प्राप्त होती है |
हालांकि उनके सिवाय किसी और ने इसका समर्थन नहीं और किया तो खंडन भी नहीं |
इसलिए शून्य के विरुद्ध एक मत से उनका दावा सिद्ध होता है |
तो उन्होंने उसी देवीय प्रेरणा से कमीशन की एक एक पाई जोड़कर करोड़ो रूपये इकट्ठा कर लिए |
अब चूंकि यह देवीय प्रेरणा से संचित धन था इसलिए इस पर किसी सरकार को टेक्स देना उन्हें गंवारा ना था |
जब कोई उनके इस देवीय धन को काला धन कहता तो वे पहले इस धन को देखकर तसल्ली करते कि यह काला नहीं हरा है और फिर काला धन कहने वाले की सात पुश्तों के साथ मुंह काला करने लगते |
एक दिन जब सरकार ने ऐलान कर दिया कि कल से ऐसा सारा धन राज्य में अप्रचलनीय हो जायेगा | ऐलान सुनकर पहले तो वे मरते मरते बचे किन्तु होश में आते ही उन्हें देवीय प्रेरणा प्राप्त हुई कि देवता सरकार से बड़ा है जो धन सरकार अस्वीकार कर दे उसे देवता फिर भी ग्रहण कर सकता है |
उन्होंने झट से दीवार और जमीन फाड़ कर ऐसा सब धन बोरो में भरा और देवता को समर्पित कर दिया |
लौटते हुए देवता उन्हें सोने की सौ कुल्हाड़ियाँ प्रसाद स्वरूप भेंट की |
अब वे चैन से सो रहे थे |
अब इस धन को कोई काला धन नहीं कह सकता था सरकार तक उसे सुनहरा धन कह रही थी ||
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