एनकाउंटर
--------------
गोल मेज कांफ्रेंस जारी थी ।सबके माथे पर चिंता की लकीरें खींची हुई थीं ।
'उसके पास से एक माचिस ,तीन किताब .दो कोरी नोटबुक ,एक पेन और चार नंबर बरामद हुये थे बस '
नीली वर्दी वाला साहब पसीना पोछते हुये बोला
'लेकिन रात को व्ही.आई.पी. इलाके मे घूमने कोई कारण भी नहीं बताया स्याले ने '
हरी वर्दी ने ने मुट्ठी भींचकर कहा
'उसकी किताब मे लिखा है देश जरनल से बड़ा है । शक्ल और बातों से साफ है कि वो देश की तरह नहीं सोचता..था.. '
पीली वर्दी ने सख्त लहजे मे कहा
'लेकिन इतना पर्याप्त नहीं है उसे देश द्रोही सिद्ध करने के लिये' नीली वर्दी ने चिंता जाहिर की ।
'माचिस के अलावा कुछ भी ऐसा नहीं मिला जिससे वो कुछ कर सकता था ...हम क्या कहें अब ? ' एक साथ सारी वर्दियों ने भुनभुनाते हुये चीफ की तरफ़ आदेश के लिये देखा ।
चीफ का चेहरा तन चुका था ।
'यही कि आत्म रक्षा मे मुठभेड़ के दौरान मारा
गया '....चीफ ने टेबल पर मुक्का मारते हुये कांफ्रेंस बर्खास्त कर दी.....
दूसरे दिन सबसे बड़ी सुर्खी थी "खतरनाक देश द्रोही एनकाउंटर मे मारा गया ' ॥
॥हनुमंत किशोर ॥
अमन के ननिहाल वाले उधर रह गये..अमन के ददिहाल वाले इधर रह गये ।
बीच मे दरिया बहता रहा जो कभी कभी लाल हो जाता....
लोग कहते फिर दिल्ली और इस्लामाबाद मे तकरार हो गयी है ॥
टीवी और अखबार जब बारूदी गंध से सने होते हैं , वो तब भी अमृता की चोटी खींचने से और मोहन और जसप्रीत को प्यार भरी गाली देने से बाज नहीं आता ॥
अमन का परिवार भले ईद मे खुश होता हो अमन को मज़ा होली दीपावली मे ज्यादा आता है वजह सिर्फ इतनी कि इन मौकों पर उसे मस्ती करने के लिये दोस्त मिल जाते है ।
लेकिन इस दफे दरिया का पानी लाल हुआ तो आसमान भी लोहे के डैने वाली चीलों से भर गया । सरहद पार से गोलियाँ छूटने लगी...धमाके होने लगे ।
अमृता ,मोहन,जसप्रीत के परिवार की तरह उसे भी बस्ती से बाहर बने बंकर मे अपने परिवार के साथ पनाह लेनी पड़ी ।
अमन के लिये सबसे बड़ा दुख यह था कि वो अपने दोस्तों के साथ मैदान मे नहीं खेल सकता था ।
अमन के अम्मी-अब्बू की तरह वो भी दुआ करता , लेकिन उसकी दुआ मे दोस्तों के संग खेल मे शरीक होने की मिन्नत होती ।
आज अम्मी ने जब से बताया कि दिवाली है तब से अमन मासूस हो गया ।
उसे दिवाली की याद रह रह कर सताने लगी ।
तब कैसे आसमान मे आतिशबाजी देखकर वे मचल उठते थे और पटाखे के धमाके पर नाचने लगते ।
धमाके तो आज भी हो रहे थे लेकिन इन्हे सुनकर सबका दिल दहल उठता था ।
किसी तरह सोया तो तो उसने ख्वाब मे देखा कि सरहद पार दोनों तरफ़ से फरिश्ते आ जा रहे है जिनमे किसी के हाथ मे ईद की सेंवई है किसी के हाथ मे दिवाली की मिठाई और पटाखे....
अमन ने आवाज़ देकर अपने दोस्तों को मैदान मे जमा कर लिया है जहाँ वे आतिशबाजी का मज़ा लेंगे..
ख्वाब जारी था कि तभी जोर का धमाका हुआ..
अमन की अम्मी ने उसे जोर से चीख कर भींच लिया....
एक लम्बी सी साँस छोड़ते हुये अमन धीरे से बुदबुदाया...."फरिश्ते सिर्फ ख्वाबों मे आते है.."
सुबह अमन का शरीर तप रहा था...अम्मी और अब्बू ...को बडबडाना समझ नहीं आ रहा था....वो मुसल्सल बड़बड़ा रहा था.."फरिश्ते सिर्फ ख्वाब मे आते हैं....."
टोबा टेक सिंह का नाम तो आपने सुना है ना साहब ??
॥हनुमन्त किशोर ॥
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गोल मेज कांफ्रेंस जारी थी ।सबके माथे पर चिंता की लकीरें खींची हुई थीं ।
'उसके पास से एक माचिस ,तीन किताब .दो कोरी नोटबुक ,एक पेन और चार नंबर बरामद हुये थे बस '
नीली वर्दी वाला साहब पसीना पोछते हुये बोला
'लेकिन रात को व्ही.आई.पी. इलाके मे घूमने कोई कारण भी नहीं बताया स्याले ने '
हरी वर्दी ने ने मुट्ठी भींचकर कहा
'उसकी किताब मे लिखा है देश जरनल से बड़ा है । शक्ल और बातों से साफ है कि वो देश की तरह नहीं सोचता..था.. '
पीली वर्दी ने सख्त लहजे मे कहा
'लेकिन इतना पर्याप्त नहीं है उसे देश द्रोही सिद्ध करने के लिये' नीली वर्दी ने चिंता जाहिर की ।
'माचिस के अलावा कुछ भी ऐसा नहीं मिला जिससे वो कुछ कर सकता था ...हम क्या कहें अब ? ' एक साथ सारी वर्दियों ने भुनभुनाते हुये चीफ की तरफ़ आदेश के लिये देखा ।
चीफ का चेहरा तन चुका था ।
'यही कि आत्म रक्षा मे मुठभेड़ के दौरान मारा
गया '....चीफ ने टेबल पर मुक्का मारते हुये कांफ्रेंस बर्खास्त कर दी.....
दूसरे दिन सबसे बड़ी सुर्खी थी "खतरनाक देश द्रोही एनकाउंटर मे मारा गया ' ॥
॥हनुमंत किशोर ॥
अमन के ननिहाल वाले उधर रह गये..अमन के ददिहाल वाले इधर रह गये ।
बीच मे दरिया बहता रहा जो कभी कभी लाल हो जाता....
लोग कहते फिर दिल्ली और इस्लामाबाद मे तकरार हो गयी है ॥
टीवी और अखबार जब बारूदी गंध से सने होते हैं , वो तब भी अमृता की चोटी खींचने से और मोहन और जसप्रीत को प्यार भरी गाली देने से बाज नहीं आता ॥
अमन का परिवार भले ईद मे खुश होता हो अमन को मज़ा होली दीपावली मे ज्यादा आता है वजह सिर्फ इतनी कि इन मौकों पर उसे मस्ती करने के लिये दोस्त मिल जाते है ।
लेकिन इस दफे दरिया का पानी लाल हुआ तो आसमान भी लोहे के डैने वाली चीलों से भर गया । सरहद पार से गोलियाँ छूटने लगी...धमाके होने लगे ।
अमृता ,मोहन,जसप्रीत के परिवार की तरह उसे भी बस्ती से बाहर बने बंकर मे अपने परिवार के साथ पनाह लेनी पड़ी ।
अमन के लिये सबसे बड़ा दुख यह था कि वो अपने दोस्तों के साथ मैदान मे नहीं खेल सकता था ।
अमन के अम्मी-अब्बू की तरह वो भी दुआ करता , लेकिन उसकी दुआ मे दोस्तों के संग खेल मे शरीक होने की मिन्नत होती ।
आज अम्मी ने जब से बताया कि दिवाली है तब से अमन मासूस हो गया ।
उसे दिवाली की याद रह रह कर सताने लगी ।
तब कैसे आसमान मे आतिशबाजी देखकर वे मचल उठते थे और पटाखे के धमाके पर नाचने लगते ।
धमाके तो आज भी हो रहे थे लेकिन इन्हे सुनकर सबका दिल दहल उठता था ।
किसी तरह सोया तो तो उसने ख्वाब मे देखा कि सरहद पार दोनों तरफ़ से फरिश्ते आ जा रहे है जिनमे किसी के हाथ मे ईद की सेंवई है किसी के हाथ मे दिवाली की मिठाई और पटाखे....
अमन ने आवाज़ देकर अपने दोस्तों को मैदान मे जमा कर लिया है जहाँ वे आतिशबाजी का मज़ा लेंगे..
ख्वाब जारी था कि तभी जोर का धमाका हुआ..
अमन की अम्मी ने उसे जोर से चीख कर भींच लिया....
एक लम्बी सी साँस छोड़ते हुये अमन धीरे से बुदबुदाया...."फरिश्ते सिर्फ ख्वाबों मे आते है.."
सुबह अमन का शरीर तप रहा था...अम्मी और अब्बू ...को बडबडाना समझ नहीं आ रहा था....वो मुसल्सल बड़बड़ा रहा था.."फरिश्ते सिर्फ ख्वाब मे आते हैं....."
टोबा टेक सिंह का नाम तो आपने सुना है ना साहब ??
॥हनुमन्त किशोर ॥
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