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सुसाइड ( suicide)

सूक्ष्म कथा : सुसाइड 
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लाश फंदे से झूलती हुई मिली थी |
दायें से देखने पर मामला ख़ुदकुशी का लगता ...बायें से देखने पर हत्या का |
अफसरों के माथे की गहरा रही शिकन के बीच ,लाश उतारकर जामा तलाशी ली गयी | लाश की ज़ेब से एक अनपोस्ट ख़त बरामद हुआ | 
उसे पढ़ते ही बड़े अफसर की शिकन और गहरी हुई लेकिन उसे छुपाते हुये अपने जूनियर से उन्होंने कहा .. “... इस सुसाइड नोट के बाद अब केस साफ़ हैं ... आगे तफ्तीश जारी रखने का मतलब नहीं है ..”
“लेकिन इसमें तो सुसाइड करने जैसा कुछ नहीं है ..” छोटे अफसर ने दबे स्वर में कहा |
“ क्यों नहीं है ....?” बड़े अफसर में डांटा और ..ख़त को जोर जोर से पढने लगा ..
** मेरी बिटिया ..
तुमने पवित्र किताब के हवाले से मेरे फैसले पर सवाल उठाया है .. तो मै नहीं मानता कि कोई भी किताब आसमान से धरती पर उतरी है ... सारी किताबे चाहे उनकी जिल्द के रंग कुछ भी हों वे इंसान द्वारा ही लिखी गयी हैं और इंसान को उन पर सवाल करने का हक है ... इंसान का विवेक की सही और गलत की इकलौती कसौटी है .... किताबे इंसान की मदद के लिए हैं और यदि वे मालिक बनने की कोशिश में हो तो उन्हें हिन्द महासागर में डुबा देना चाहिये ||”
‘तुम्हारा पिता’ **
ख़त खत्म करने के साथ बड़े अफसर ने फैसलाकुन अंदाज़ में कहा ....”ऐसा खत लिखना और सरे राह ज़ेब में रखकर घूमना ...सुसाइड से कम है क्या ..?”
और ख़त के लिफाफे से अपना जूता चमकाने लगा ||||||


face book 8 /8 /2014 

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