सूक्ष्म कथा : मै बारिश ही हूँ
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बालकनी में हम तीन थे ..मै .. चार्ली और कालिदास और हाँ चौथा भी था लेकिन नहीं के बराबर ..यानी मेरी पत्नी ....जो गिलास -बर्फ-सोडा फिंगरचिप्स के साथ बालकनी और किचन के बीच दौड़ रही थी |
बालकनी के बाहर बारिश थी जैसे वर्ड्स वर्थ ..लोंग्फेलो..विटमेन की कविताओं की एक काकटेल आसमान से बरस रही हो .... एक शीतल सरगम ... ध म रे नि सा..साSSSSSSS
गांधार तक आते आते चार्ली सेंटी हो गया और बोला .. “ जानते हो मुझे बारिश का मौसम क्यों पसंद है .?.क्योंकि इसमें मै अपने आंसुओं को छुपा सकता हूँ |”
“और मुझे इसलिए पसंद है क्योंकि मुझे लगता है कि मल्लिका के लिए मेरा हृदय अकेले नहीं रो रहा ...साथ में आसमान भी रो रहा है |” ..कालिदास ने पंचम लगाया
और तुम्हे ??? दोनों मेरी ओर पलटे ..
“ मुझे इसलिए पसंद है कि बारिश मुझे हँसने का एक बहाना देती है मुझे लगता है कि बारिश ने मेरे हिस्से का भी रो लिया है |” मैंने धैवत छेड़ा ..
हम सब अपनी सरगम पूरी कर चुके थे कि नज़र कोने में रेलिंग पर टिकी पत्नी पर टिक गयी ..|
तुम्हे बारिश क्यों पसंद है ? मैंने पूछा ..
“ मै बारिश ही हूँ ...|” उसने कहा ...
बालकनी के भीतर मानो बिजली गिर पड़ी थी |||
on face book 21/8/2014
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बालकनी में हम तीन थे ..मै .. चार्ली और कालिदास और हाँ चौथा भी था लेकिन नहीं के बराबर ..यानी मेरी पत्नी ....जो गिलास -बर्फ-सोडा फिंगरचिप्स के साथ बालकनी और किचन के बीच दौड़ रही थी |
बालकनी के बाहर बारिश थी जैसे वर्ड्स वर्थ ..लोंग्फेलो..विटमेन की कविताओं की एक काकटेल आसमान से बरस रही हो .... एक शीतल सरगम ... ध म रे नि सा..साSSSSSSS
गांधार तक आते आते चार्ली सेंटी हो गया और बोला .. “ जानते हो मुझे बारिश का मौसम क्यों पसंद है .?.क्योंकि इसमें मै अपने आंसुओं को छुपा सकता हूँ |”
“और मुझे इसलिए पसंद है क्योंकि मुझे लगता है कि मल्लिका के लिए मेरा हृदय अकेले नहीं रो रहा ...साथ में आसमान भी रो रहा है |” ..कालिदास ने पंचम लगाया
और तुम्हे ??? दोनों मेरी ओर पलटे ..
“ मुझे इसलिए पसंद है कि बारिश मुझे हँसने का एक बहाना देती है मुझे लगता है कि बारिश ने मेरे हिस्से का भी रो लिया है |” मैंने धैवत छेड़ा ..
हम सब अपनी सरगम पूरी कर चुके थे कि नज़र कोने में रेलिंग पर टिकी पत्नी पर टिक गयी ..|
तुम्हे बारिश क्यों पसंद है ? मैंने पूछा ..
“ मै बारिश ही हूँ ...|” उसने कहा ...
बालकनी के भीतर मानो बिजली गिर पड़ी थी |||
on face book 21/8/2014
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