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सशक्तिकरण दौड़ (empowerment of woman )

सूक्ष्म कथा : सशक्तिकरण दौड़ 
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सरकार ने महिला सशक्तिकरण दौड़ का आयोजन किया |
जिसमे साहब को महिलाओं को सशक्त करने के लिए दौड़ने जाना था |तो आज उनकी "वे" को छ: बजे की जगह आज पांच बजे उठना पड़ा | साहब को दो की जगह उन्हें तीन 'बेड टी' देनी पड़ी तब कही जाकर वे दौड़ने लायक हुए | 
जैसे ही दौड़कर वापस आये उनकी ‘वे’ उनके जूते ..ट्रेक शूट सहेजने और उनकी नहाने-खाने-जाने की तैयारी के लिए दौड़ने लगीं |
उधर पड़ोसी मैडम को भी अपने विभाग की ओर से दौड़ने जाना था तो आज उन्हें भी छ : की जगह आज पांच बजे उठना पड़ा | नाश्ता और बच्चोके टिफिन तैयार कर वे किसी तरह घर से निकलीं |
अभी अभी दौड़कर उन्होंने भीतर कदम ही रखा था ..पति चार मुख से चिल्लाये . मोज़े कहाँहैं ..? घंटे भर से फ़ाइल नहीं मिल रही ...और रूमाल आज धोया क्यों नहीं ?... ये मोबाइल चार्ज क्यों नही है ...?
और मैडम थीं कि फिर से दौड़ने लगीं ...
सरकार का मानना है कि दौड़ से महिला सशक्तिकरण होता है |||

 face book 27/8/ 2014

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