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deal ( सौदा )

सूक्ष्म कथा : डील 
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डायनिंग टेबल पर सन्नाटा पसरा हुआ था | 
उनकी आँखों की चील ने एक गोल चक्कर काटा और वे गुर्र्राये ... “ यदि तुमने खानदान की इज्ज़त के खिलाफ उस बदजात से शादी की तो तुम्हे इस घर से एक फूटी कौड़ी नहीं मिलेगी ..”
“तो फिर मै भी उसे नहीं छोड़ सकता ..” वो घायल कबूतर की तरह रिरियाया |
“इन्होने उसे छोड़ने कब कहा , ये तो खानदान के हिसाब से खानदानी बहू लाने को कह रहे है ...” माँ की बिल्लौरी आँखे मुस्कुरायीं और उन्होंने बेटे को कमरे के भीतर चलने का इशारा किया |
कुछ देर समझने समझाने के बाद माथे पर छलछला आये पसीने को पोछते हुए लड़के ने लड़की को फोन पर अपनी परेशानी बतायी और एक डील रखी |
जिसके जवाब में दूसरी ओर से तराजू के संतुलित पलड़े की तरह सीधी और ठहरी हुई आवाज आयी .. “ डार्लिंग ... मुझे भी तुम्हारे खानदान की बहू बनने में कोई दिलचस्पी नहीं है हाँ 'लिव इन रिलेशनशिप' तभी रहेगी जब तुम बायपास वाला बंगला नहीं ग्रीनवेली वाला फार्महाउस अपने डैडी से मेरे नाम करवा दोगे .....दैट्स फायनल |”
बेटे से माँ ,माँ से बाप तक डील पहुंची तो सन्नाटा खुसरफुसर में बदल गया ... अंत में खानदान की इज्ज़त के लिए बाप फ़ार्म हाउस की बली देने को और बेटा बीबी के लिए अपनी पसंद की बली देने को तैयार हो गया |
'डील' पटते ही माँ ने राहत की साँस ली कि चलो सांप भी मर गया और लाठी भी बच गयी |||||


फेस बुक २४/८ / २०१४ 

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