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pimples and wrinkles

कथा :मुहाँसे और झुर्रियाँ
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उसके और मेरे बीच उतना ही फर्क था जितना मुहाँसे और झुर्रियों के बीच होता है |
मै एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहा था | उस विषय की शोधार्थी होने के नाते वो मेरे साथ थी | उसे अक्सर या तो मुहाँसों की शिकायत होती या ब्याय फ्रेंड की | जिस दिन सुबह उसके चेहरे पर मुहाँसे दिखते रात तक ब्रेकअप सुनायी दे जाता | हाँ तब उसका गोभी सा फूला गोल चेहरा लौकी सा लम्बोतरा हो जाता और वो लेंस पहन लेती | कह नही सकता कि उसके हर ब्रेकअप को सुनकर मै खुश क्यों होता था लेकिन ये सही है |
उस शाम कॉफ़ी हाउस में मैंने उसके चेहरे पर दो मुहाँसे नोटिस किये और अंदेशा सही निकला | अपने ब्रेकअप को सुनाते हुये वो सिसकियाँ भरने लगी |
“ चिंता मत करो सब ठीक हो जायेगा |इस उम्र में प्यार मुहाँसो की तरह आता जाता रहता है |” मैंने टिश्यू पेपर उसकी ओर बढ़ाते हुये कहा |
शायद सर्दी का असर रहा हो ,जो ना चाहकर भी मेरा लहजा हमदर्दी की जगह तंज़ भरा हो गया था |
उसने थोड़ी देर में खुद को सम्भाला और मेरी तरफ कॉफ़ी बढ़ाते हुये पलटवार किया
“ और आपकी उम्र का प्यार झुरियो की तरह होता है..एक बार आ गया तो फिर कभी नहीं जाता, हैं ना अंकल ?”
उसका ‘अंकल’ बारूद की तरह फटा और मेरे नीचे की ज़मीन खिसक गयी |
वो कॉफ़ी पीकर उठ गयी लेकिन मै हवा में झूलता रहा |||

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