प्रियतम
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उस दोपहर कोने वाली टेबल से वह मुँह फेर कर उठ गयी |
अज़ाब क्या होता है ? यह उस दिन ही जाना था |
शाम को जली बत्तियां , रात बुझने को हो आयी लेकिन एक तूफ़ान की गिरफ्त में वो इस गली से उस गली गुजरता रहा |
लेकिन आधी रात आते आते उसे लगने लगा कि दिल का दर्द नीचे पेट की तरफ उतर रहा है |देर रात रेलवे के ढाबे के सामने जब वो पहुँचा तो उसे लगा कि वो सिमट कर सिर्फ पेट रह गया है |
ढाबे की पानियल दाल में डुबोकर जब चौथी और आखरी रोटी का अंतिम निवाला उसने मिर्च के टुकड़े के साथ हलक से नीचे सरकाया तो महसूस किया कि पेट का दर्द गायब हो चुका है किन्तु दिल का दर्द फिर उठने लगा है |
इस बार दर्द उठने पर वो हलके से मुस्कुराया | अब वो दर्द को ख़ुशी ख़ुशी झेल सकता था |
उसने अपनी ज़ेब से कागज़ निकाला और जहाँ जहाँ ‘प्रिय ’ लिखा था वहाँ काटकर ‘रोटी’ लिख दिया |
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उस दोपहर कोने वाली टेबल से वह मुँह फेर कर उठ गयी |
अज़ाब क्या होता है ? यह उस दिन ही जाना था |
शाम को जली बत्तियां , रात बुझने को हो आयी लेकिन एक तूफ़ान की गिरफ्त में वो इस गली से उस गली गुजरता रहा |
लेकिन आधी रात आते आते उसे लगने लगा कि दिल का दर्द नीचे पेट की तरफ उतर रहा है |देर रात रेलवे के ढाबे के सामने जब वो पहुँचा तो उसे लगा कि वो सिमट कर सिर्फ पेट रह गया है |
ढाबे की पानियल दाल में डुबोकर जब चौथी और आखरी रोटी का अंतिम निवाला उसने मिर्च के टुकड़े के साथ हलक से नीचे सरकाया तो महसूस किया कि पेट का दर्द गायब हो चुका है किन्तु दिल का दर्द फिर उठने लगा है |
इस बार दर्द उठने पर वो हलके से मुस्कुराया | अब वो दर्द को ख़ुशी ख़ुशी झेल सकता था |
उसने अपनी ज़ेब से कागज़ निकाला और जहाँ जहाँ ‘प्रिय ’ लिखा था वहाँ काटकर ‘रोटी’ लिख दिया |
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