सूक्ष्म कथा :आभासी और वास्तविक यथार्थ
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आचार्य इन दिनों कुर्ता फाड़कर गली गली एक ही प्रलाप कर रहे हैं -
“ वो आभासी यथार्थ है ..वास्तविक यथार्थ में लौट आओ ”...|
आचार्य की ४४ इंची बैलून तोंद लटक कर २४ इंच की पिचकी पिचकारी हो गयी है |
शोध करने पर ज्ञात हुआ कि नेट पर साहित्यकारों की सक्रियता बढ़ने से अब आचार्य का उपवास कई दिनों तक नहीं टूटता |उनकी आलोचना का बाज़ार भीषण मंदी की चपेट में है |पहले आये दिन समीक्षा , सम्मान , विमोचन के कार्यक्रमों में आचार्य का भोज हो जाता था | अब फेस बुक पर कविता है | नेट पर ही पुस्तक का प्रकाशन है |नेट पर ही विमोचन और भोज है |
आचार्य माल पुआ का चित्र ज्यों ज्यों देखते है ,उनकी क्षुधा मरोड़ मारने लगती है और वे चिल्ला उठते है-
“ वो आभासी यथार्थ है ..वास्तविक यथार्थ में लौट आओ ”...|
“ वो आभासी यथार्थ है ..वास्तविक यथार्थ में लौट आओ ”...|
आचार्य का प्रलाप आभासी है या वास्तविक यह शायद इतिहास तय करेगा |
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आचार्य इन दिनों कुर्ता फाड़कर गली गली एक ही प्रलाप कर रहे हैं -
“ वो आभासी यथार्थ है ..वास्तविक यथार्थ में लौट आओ ”...|
आचार्य की ४४ इंची बैलून तोंद लटक कर २४ इंच की पिचकी पिचकारी हो गयी है |
शोध करने पर ज्ञात हुआ कि नेट पर साहित्यकारों की सक्रियता बढ़ने से अब आचार्य का उपवास कई दिनों तक नहीं टूटता |उनकी आलोचना का बाज़ार भीषण मंदी की चपेट में है |पहले आये दिन समीक्षा , सम्मान , विमोचन के कार्यक्रमों में आचार्य का भोज हो जाता था | अब फेस बुक पर कविता है | नेट पर ही पुस्तक का प्रकाशन है |नेट पर ही विमोचन और भोज है |
आचार्य माल पुआ का चित्र ज्यों ज्यों देखते है ,उनकी क्षुधा मरोड़ मारने लगती है और वे चिल्ला उठते है-
“ वो आभासी यथार्थ है ..वास्तविक यथार्थ में लौट आओ ”...|
“ वो आभासी यथार्थ है ..वास्तविक यथार्थ में लौट आओ ”...|
आचार्य का प्रलाप आभासी है या वास्तविक यह शायद इतिहास तय करेगा |
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