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“तब हमें हुकुम सरकार की कोठियों पर नाचना होता ...रात रात भर जलसा होता.. एक दिन सरकार का हुकुम हुआ ..ऐ बेडनी.. नंगी नाच...” बेडनी ने अपनी राम कहानी सुनाते हुये साँस भरी ..
“फिर .. क्या तुम नंगी नाची ?” गुलाबो ने पूछा
“और नहीं तो क्या ?..गाय और बेडनी की एक ही गति होती है ..उसने दूध बंद किया तो कसाई को ...इसने नाच बंद किया तो कसाई को.. शर्...म करती तो मारी जाती, सो सब के आगे अपने हाथो अपनी शर्म उतारकर नाची..उस समय लगा था कि काश धरती फट जाये तो उसमे समा जाऊं या आसमान टूट पड़े तो उसके नीचे दब जाऊं ..पर मानो धरती आसमान सब सरकार से मिले हुये थे..|”
“मिले तो आज भी है नानी” गुलाबो ने साँस भरी
“ अरे नहीं रे ..वो ज़माना गुलामी का था ..अब ज़माना बदल गया है |” कहते हुये बेडनी ने करवट ली
“ज़रूर बदला है ...तुम्हे चली आ रही सरकार नचाती थी ..हमें चुनी हुई सरकार नचाती है. |” .. लंबी साँस के साथ गुलाबो ने भी करवट बदल ली |||
(बेडनी : नाचकर आजीविका कमाने वाली जाति )
(चित्र गूगल साभार )

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