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गणित



सूक्ष्म कथा : गणित
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चरर्रररर... चू .... के साथ गाड़ी झटके से रुकी और उन्होंने देखा कि सायकल और झोले से कुछ दूरी पर वो गिरा पड़ा था | सर से खून अब भी बह रहा था | कुछ देर पहले ही शायद कोई गाड़ी टक्कर मार कर भाग गयी होगी |
उन्होंने अपने एक आदमी की मदद से उसे उठाकर गाड़ी में डाला | इशारा पाकर दूसरे आदमी ने मोबाइल क्लिक किया | गाड़ी राजधानी की और दौड़ने लगी |
वे आग में अपनी रोटियां सेकक...र , देहात से लौट रहे थे | वे खुश थे कि जो बीज उन्होंने बोये थे , चुनावी मौसम में उसकी फसल कटाई के लिए तैयार थी |
उधर पीछे लेटा घायल..होश में आते ही जैसे बडबडाया उनके माथे पर बल पड़ गये .. “ अरे .. ...ई तो अपनी कौम का नहीं जान पड़ता ...तनिक नाम तो पूछिये इसका ”
और नाम सुनते ही वे चिल्ला पड़े ..
“ गाड़ी रोक ...मौजी इसे उतार का किनारे रख दे ..पब्लिक को मालूम हुआ कि हम इसे बचाये है तो सब किये धरे पर पानी फिर जायेगा ”...
लेकिन गाड़ी के रुकते ही मौजी का दिमाग चलने लगा ,उन्हें किनारे ले जाकर उनके कान में फुसफुसाया ..
“ अभी का फिकर छोड़िये ...अभी किसी को पता नहीं चलने देंगे ..पर सोचिये जीतने के बाद सद्भावना रैली भी तो करनी पड़ेगी ...उसमे यही हमारे काम आयेगा ...”
“..अरे ई तो दिमाग में नहीं आया था ” कहते हुये उन्होंने मौजी को शाबाशी भरी नज़रों से देखा |
गाड़ी अब दूनी रफ़्तार से राजधानी की और दौड़ रही थी और वे मोबाइल में फोटो को देखकर मंद मंद मुस्कुरा रहे थे |

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