सूक्ष्म कथा : श्रीमान शर्मा *************************************
मोड़ पर मज़मा लगा था , उत्सुकतावश मैने भी भीतर झांका |
देखा तो एक कुत्ता भौंके जा रहा था ,लेकिन ये विचित्र बात नहीं थी |
विचित्र तो यह था कि श्रीमान शर्मा...भी उस पर उतने ही जोश से भौंके जा रहे थे |
मैं किसी तरह श्रीमान शर्मा को किनारे तक ले गया |
और फुसफुसाया ....“ये आप क्या कर रहे है ?”
“मै इसका प्रतिवाद कर रहा हूँ” उन्होंने मुझे समझाया
“वो तो कुत्ता है ,,,पर आप तो आदमी होकर...”
“आप समझते नहीं ..यदि मै इस पर नहीं भौंका तो लोग मेरी प्रतिबध्दता पर शक करेंगे ..”
मुझे बीच में ही टोकते हुए वे फुसफुसाये और पसीना पोछकर प्रतिवाद में जुट गये |
श्रीमान शर्मा की गिनती मोहल्ले के बुद्धिजीवियों में होती है ||
हालाँकि श्रीमान शर्मा स्वयं अपनी गणना अंतर्राष्ट्रीय बुद्धिजीवियों में करते हैं |||
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