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आगे छोटे बच्चे बैठे थे उनकेपीछे औरते और बूढ़े |सबसे पीछे बीड़ी के धुएँ में कुछ मर्द थे | सामने तालियों के बीच जादूगर टोपी से खरगोश निकाल कर अब लड़की को हवा में उड़ाने का तमाशा दिखा रहा था |
शहर की चेरिटी संस्था ने झुग्गी बस्ती ...में आज मेजिक शो आयोजित किया था |
तमाशे के बीच जादूगर हवा में हाथ हिलाकर टाफी , चिप्स और खिलोने बच्चों को बाँटने लगा | महिलाओं की तरफ भी क्रीम और शेम्पू पाउच उछाले |
तालियों के बीच एक लड़का गुमसुम बैठा था | जादूगर सामने से गुजरा तो उसने उसके गाउन का सिरा हल्के से खींचते हुए कहा ‘...बाई के लिये भी कुछ दे दो ना साहब’ “
कौन बाई ?”
“मेरी माँ ...सब उसे बाई बुलाते हैं तो मेरे मुँह से बाई निकल जाता है |” लड़के ने साफ किया |
‘क्या चाहिये ?’
“ कोई दवा दे दो ना साहब ..बाई तीन दिन से बुखार में है |” लड़का रिरिआया
क्षण भर के लिये जादूगर को लगा कि बीच चौराहे में उसके कपड़े उतर गये हैं |
और वो तेज़ी से स्टेज की तरफ बढ़ गया ||||
( चित्र साभार गूगल )

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