सूक्ष्म कथा :
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उनमें शराफत कूट कूट कर भरी है |
यहाँ तक कि चिक हटी होती है और मै भी सामने होती हूँ फिर भी वे खँखारकर पूछेगे ..”बेगम क्या मै अन्दर आ सकता हूँ ?”
पर उस दिन मुझे लगा कि उनकी शराफत का मुरब्बा बनाकर मर्तबान में रख दूँ |
... ....हम मियां बीबी अपने कमरे में थे कि उनका ढीठ दोस्त दरवाज़े ठेलकर अन्दर आ धमका और मुझे बेहिजाब देखकर दांत चिराकर हँसने लगा |
मैंने सोचा ‘ये’ अब आगे बढ़ेगें और एक मुक्के में उसके दांत हथेली पर रख देंगे |
पर 'ये' तो बगले झांककर खिसिया कर रह गये |
मै उनके दोस्त को कोसते हुए तमतमाकर गुसलखाने की तरफ भागी |
आज भी सोचती हूँ ..उस दिन मेरे साथ कमरे में कौन था शौहर या केचुआ ???
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उनमें शराफत कूट कूट कर भरी है |
यहाँ तक कि चिक हटी होती है और मै भी सामने होती हूँ फिर भी वे खँखारकर पूछेगे ..”बेगम क्या मै अन्दर आ सकता हूँ ?”
पर उस दिन मुझे लगा कि उनकी शराफत का मुरब्बा बनाकर मर्तबान में रख दूँ |
... ....हम मियां बीबी अपने कमरे में थे कि उनका ढीठ दोस्त दरवाज़े ठेलकर अन्दर आ धमका और मुझे बेहिजाब देखकर दांत चिराकर हँसने लगा |
मैंने सोचा ‘ये’ अब आगे बढ़ेगें और एक मुक्के में उसके दांत हथेली पर रख देंगे |
पर 'ये' तो बगले झांककर खिसिया कर रह गये |
मै उनके दोस्त को कोसते हुए तमतमाकर गुसलखाने की तरफ भागी |
आज भी सोचती हूँ ..उस दिन मेरे साथ कमरे में कौन था शौहर या केचुआ ???
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