सूक्ष्म कथा :
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दुनिया तब एक गाँव बन चुकी थी |
उस गाँव के पूरब एक विशाल काया का गरीब रहता था |
जि सके पास पूँजी के नाम पर बाप, दादाओं के घिसे हुए मैडल थे |
... जिन्हें छाती से लगाकर घूमता और शेखी बघारता रहता |
उसकी एक जोरू भी थी जो गरीब की जोरू होने के नाते गाँव की भौजाई थी |
राह चलते कोई भी भद्दे इशारे कर देता |बच्चे उसे आजादी कहकर चिढाते |
तंग आकर एक दिन जोरू ने मर्द से कहा “ रक्षा का वचन दिये हो तो रक्षा भी करो”
गरीब ने कहा “ बस थोड़े दिनों में दूध पीकर बदन बना लूँ फिर सबको छठी का दूध याद दिला दूंगा |”
और मूंछो पर ताव देता हुआ बाल्टी लेकर बाहर निकल गया |
जोरू ने माज़रा समझने के लिये पीछा किया तो यह देखकर कपार ठोंक लिया
कि उसका मर्द सबसे छुपकर एक बैल के नीचे बाल्टी रखकर बैल दुहने की कोशिश कर रहा था |||
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दुनिया तब एक गाँव बन चुकी थी |
उस गाँव के पूरब एक विशाल काया का गरीब रहता था |
जि सके पास पूँजी के नाम पर बाप, दादाओं के घिसे हुए मैडल थे |
... जिन्हें छाती से लगाकर घूमता और शेखी बघारता रहता |
उसकी एक जोरू भी थी जो गरीब की जोरू होने के नाते गाँव की भौजाई थी |
राह चलते कोई भी भद्दे इशारे कर देता |बच्चे उसे आजादी कहकर चिढाते |
तंग आकर एक दिन जोरू ने मर्द से कहा “ रक्षा का वचन दिये हो तो रक्षा भी करो”
गरीब ने कहा “ बस थोड़े दिनों में दूध पीकर बदन बना लूँ फिर सबको छठी का दूध याद दिला दूंगा |”
और मूंछो पर ताव देता हुआ बाल्टी लेकर बाहर निकल गया |
जोरू ने माज़रा समझने के लिये पीछा किया तो यह देखकर कपार ठोंक लिया
कि उसका मर्द सबसे छुपकर एक बैल के नीचे बाल्टी रखकर बैल दुहने की कोशिश कर रहा था |||
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