सूक्ष्म कथा :
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उन दोनों ने एक साथ लिखना शुरू किया था |
सुनहरी कलम ने अंधे को सूरदास लिखा और यह भी कि कौम को इससे बेहतर रहनुमाई नहीं मिल सकती |
सुनहरी कलम के दोस्तों की तादाद तेज़ी से बढ़ी और इनाम इकराम से म...ालामाल हो गयी |
मगर खाकी कलम लोगों की आँखों में झांककर बिन्द और तिल की निशानदेही करती रही और चेतावनी देती रही कि वे रहनुमा के पीछे आँख खोलकर चलें |इस नुक्ताचीं में खाकी कलम के दोस्त भी दुश्मन बनते गये |
उधर सूरदास की अंधी रहनुमाई में पीछल्गू कौम खाई में जा गिरी | तब बचे खुचे लोंगों ने खाकी कलम के कहे को याद किया और उसकी तलाश में निकल पड़े |
लोंगो ने पाया कि खाकी कलम पागल हवा बनकर वीराने का चक्कर काट रही है |||||
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उन दोनों ने एक साथ लिखना शुरू किया था |
सुनहरी कलम ने अंधे को सूरदास लिखा और यह भी कि कौम को इससे बेहतर रहनुमाई नहीं मिल सकती |
सुनहरी कलम के दोस्तों की तादाद तेज़ी से बढ़ी और इनाम इकराम से म...ालामाल हो गयी |
मगर खाकी कलम लोगों की आँखों में झांककर बिन्द और तिल की निशानदेही करती रही और चेतावनी देती रही कि वे रहनुमा के पीछे आँख खोलकर चलें |इस नुक्ताचीं में खाकी कलम के दोस्त भी दुश्मन बनते गये |
उधर सूरदास की अंधी रहनुमाई में पीछल्गू कौम खाई में जा गिरी | तब बचे खुचे लोंगों ने खाकी कलम के कहे को याद किया और उसकी तलाश में निकल पड़े |
लोंगो ने पाया कि खाकी कलम पागल हवा बनकर वीराने का चक्कर काट रही है |||||
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