कथा : *************************************************************************************************
“बड़ा नरम गोश्त था .... बहुत दिनों बाद पेट के साथ जी भी भरा”
दांत में फंसा मांस निकालते हुए पहले ने कहा |
“हाँ ...मगर ये अभी बच्चा ही था ..खेलने खाने के दिन थे ”
दूसरे ने हड्डी चबात...े हुये कहा |
“जिसका समय पूरा हो गया ..हम क्या कर सकते है ? हम तो निमित्त मात्र हैं”
डकार लेकर पहले ने ज्ञान आसन लगाया |
“पर हम थोडा और पीछा करते तो व्यस्क खरगोश को पकड़ लेते ..शायद इसकी माँ ..”
“ तू भी कुत्ता होकर इमोशनल हो जाता है ....ज़रा आदमियों से सीख ..माँ बाप बेटा बेटी सब माया है”
दूसरा अभी बात पूरी भी ना कर सका था कि पहला वीरासन लगाकर गुर्राया ..
दूसरा इस पर भी नहीं माना और बोला “आत्मा की शांति के लिये दो मिनट का मौन रख सकते है”...
“ठीक है” पहले ने कहा|
दोनों श्रद्धांजलि दे ही रहे थे कि चिड़ीमार बन्दूक की आवाज़ के साथ लहुलुहान परिंदा उनके सामने गिरा और तड़पने लगा ...
“चल भाग ...हमारा बाप आ गया ..हम पेट के लिये शिकार करते है और ये शौक के लिये ..”
पहले ने कहते हुये छलांग मारी, दूसरा अभी भी हैरानी के साथ परिंदे का तड़पना देख रहा था ||||
(चित्र गूगल साभार )
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