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नया जन्म


सूक्ष्म कथा :
नया जन्म
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.....सब बच्चे अपने अपने में व्यस्त थे |
बस मिठ्ठू थी कि काठ के घोड़े पर चढती और उतर जाती ...
फिर वो बेंच पर चुपचाप बैठ गयी |
‘मिठ्ठू ,,,बिटिया क्या बात है ?’ प्ले स्कूल का टीचर होने के नाते मैंन...े पूछा ..|
“ये घोड़ा बाते नहीं करता ...गाना भी नहीं सुनाता ...”मिठ्ठू की आवाज़ में दर्द था |
‘घोड़े बाते नहीं करते ...सिर्फ आदमी बाते करते है ..’मैंने समझाना चाहा ..
“करते है ....पापा घर में घोड़ा बनते है तो बाते भी करते है..गाना भी सुनाते है ..”मिठ्ठू ने एक साँस में कहा |.
मेरे भीतर का टीचर असहाय हो चला था |तभी मेरे भीतर का बाप जागा |
और ’मैंने उसके सामने घोड़ा बनते हुये कहा...‘ये घोड़ा भी बात करता है ......’
हँसते हुये मिठ्ठू अब घोड़े से बात कर रही थी .....
इस तरह घोड़े के रूप में मेरा नया जन्म हुआ और मै पूर्व जन्म के कई पापो से मुक्त हो गया ......|||

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