सूक्ष्म कथा : लिफ़ाफ़े**************************
लाला के यहाँ से लौटकर सुक्कू बुआ धड़ाम से देहरी पर बैठ गयीं |
नासपिटा जाने क्या चाहता है ? तीन रात से आँख फोड़कर
लिफ़ाफ़े बनाये और हरामी ने सब छाँट दिये .बुआ एक सांस में बडबडाई
...और चिल्लाई ' बिट्टो..ज़रा पानी ला '..|
पानी पीते पीते बुआ ने पूरी राम कहानी सुना डाली कि लाला
पिछले कुछ महीनो से आधे से ज्यादा लिफ़ाफ़े सही नहीं है कहकर छाँट
देता है और ३०० की जगह १०० , ५० टिका देता है|
‘ला मुझे दे देखती हूँ कु** को’ ....बिट्टो बचे लिफ़ाफ़े लेकर तीर की तरह छूटी और लौटी तो २५० रूपये बुआ के हाथ में धर दिये |
बुआ ने सवालिया निगाहों से देखा तो बिट्टो बोली .. “डर मत वो मठहा बिलार हांड़ी में मुंह मारना चाहता है पर में भी तेरी सिखाई
बिल्ली हूँ मरदूद का मुंह नोच लूंगी ..”
बिट्टो ने दुपट्टा कमर में कसा और चौका बासन करने निकल गयी |
बुआ की आँखों में अपनी बिल्ली को लेकर संतोष था ... और मुठ्ठी में बंद रुपयों से आने वाली दमे की दवा को लेकर राहत |
(चित्र : गूगल साभार पिकासो )
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