फौजी डब्बा
टेशन पर तिल
रखने की जगह ना थी | ट्रेन आयी तो जितने
अंदर थे उतने उपर भी |
छोटे बच्चे को
गोद में चाँपे एक स्त्री को पायदान पर लटका देख गुरुजी को खूब लड़ी मर्दानी याद हो आयी ||
अचानक एक बोगी
को खाली देखकर गुरुजी उस ओर तेज़ी से लपके |
पहुँचेतो बोगी अंदर से
बंद थी ..और गेट पर खड़िया से लिखा था .. मिलेट्री
|
गुरुजी रिरियाये
........ प्लीज . प्लीज प्लीज....गूं गूं गूं गूं गूं गूं गूं गूं गूं गूं ***
उनकी हर रिरियाहट पर खिड़की
से एक कटोरा कट चेहरा गोली की तरह गरजता ....फौजी बोगी है बाबा आगे बढ़ो ...
गुरूजी गार्ड से
लेकर टीसी तक चक्कर मार आये सभी ने कहा ... ‘डब्बे में फौजियों ने कब्ज़ा कर लिया है ..मगर वे कुछ नहीं कर सकते ...उन्हें ही एडजेस्ट करना होगा |’
गुरुजी ट्रेन की
सीटी के साथ फिर उसी डब्बे की तरफ तेज़ी से लपके |
इस बार कटोरा कट बम की तरह फटा .. ‘अबे बुड्डे कहा ना फौजी डब्बा है ...आगे जाकर क्यों नहीं मरता’
इस बार कटोरा कट बम की तरह फटा .. ‘अबे बुड्डे कहा ना फौजी डब्बा है ...आगे जाकर क्यों नहीं मरता’
पर गुरुजी चलती ट्रेन में दरवाजे पर झूल गये ....
उन्हें यकीन था उनपर तरस खाकर कोई फौजी गेट खोल देगा ....
बोगी खुलवाने के लिए गुरूजी जोर जोर से 'पुष्प की अभिलाषा गाने लगे ' ....
उन्हें यकीन था उनपर तरस खाकर कोई फौजी गेट खोल देगा ....
बोगी खुलवाने के लिए गुरूजी जोर जोर से 'पुष्प की अभिलाषा गाने लगे ' ....
गुरुजी रिटायरमेंट के बाद भी १५ अगस्त और २६ जनवरी पर झंडा रोहण में शामिल होते और 'पुष्प की अभिलाषा ' का सस्वर पाठ करते |
अपने लड़के को भी उन्होंने मातृभूमि पर शीष चढाने 'भर्ती' में खड़ा किया लेकिन दौड़ में फिसड्डी होने से वो कोआपरेटिव की क्लर्की तक ही चढ़ सका |
आज खबर आयी नातिन सीरियस है तो झोले में दो जोड़ी कुर्ता धोती और गाय के घी का डब्बा डालकर गुरूजी टेशन आ गये |
उधर ट्रेन जैसे जैसे रफ़्तार पकड़ रही थी गुरुजी की पकड़ ढीली होती जा रही थी ||||
(चित्र गूगल साभार )

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