सूक्ष्म कथा :धतूरा
‘भैया सरकार’ का तब नया अवतार हुआ |
जब उनकी शोभा यात्रा
में ‘गुल्लर’ पत्थर बरसाने लगा और ‘भैया सरकार’ ने उसे ना केवल माफ किया बल्कि साथ मे हवेली ले आये |
हुआ यूँ कि सरकार
के लठैत जैसे ही बढ़े, ‘गुल्लर’ की माँ सरकार के कदमों मे गिरकर बोली कि
लड़कपन में धतूरा खा लेने से ‘गुल्लर’ सही गलत का फर्क भूल गया है |
हवेली में ‘भैया सरकार’ उसे बड़े लाड़ से धतूरे का बीज मिला स्पेशल चिकन सूप पिलाते जिससे ‘गुल्लर’ कुछ हफ्तों में ही लाल गिरदान हो गया |
वो अब दो टांगो वाला
कुत्ता बन चुका था |
इधर ‘भैया सरकार’ उसे जिस पर छू कर देते वो या तो अस्पताल पहुँच जाता या श्मशान |
उधर ‘गुल्लर’ के लिए हर गुनाह मुआफ था क्योंकि डाक्टरी सर्टिफिकेट में वह दिमागी तौर पर अनफिट
था |
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‘भैया सरकार’ की सल्तनत के अकेले वारिस मुन्ना सरकार भी ‘गुल्लर’ की तरह ताक़तवर होने के लिए स्पेशल चिकन सूप चोरी चोरी पीने लगे |
|उनकी आँखों में
भी वही लाल डोरे तैरने लगे जो गुल्लर की आँखों में तैरा करते थे |
‘भैया सरकार’ ने वे डोरे देखे ज़रूर लेकिन हवेली में डूबे रहने से उनके खतरे को नज़र अंदाज़ कर
गये | सल्तनत उनके लिए धतूरे से कम ना थी |
फिर एक दिन चांदनी
रात ‘मुन्ना सरकार’ मुंडेर पर लाल डोरों के साथ टहल रहे थे तो ऐसे फिसले कि फिर ना उठे |
सदमे से ‘भैया सरकार’ की सुध बुध भी जाती रही |
अब हवेली मे दो ही
प्राणी बचे थे .. ‘भैया सरकार’ और ‘गुल्लर’ लेकिन उनके लिए कोई ‘अवतार’ दूर दूर तक दिखायी नहीं दे रहा था ||||
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