सूक्ष्म कथा :
पुनर्विलोकन
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शादी की स्वर्णिम सालगिरह पर “he” और “she” ने तय किया कि
वे साथ बिताये यादगार लम्हों को बारी बारी से
दोहरायेंगे ..|
“he” ने तब एक गीत गाया जिसमें सुहानी राते थी ,छायेदार
रास्ते थे , प्रेममयी सुन्दर समर्पित संगिनी थी ..|
अपनी बारी
पर “she” ने एक कहानी कही जिसमें शिकवा था , नील के निशान थे , टूटन थी ,छलावा था |
“he” ने हैरानी और गुस्से से पूछा ऐसा हमारे बीच कब हुआ ??
“she” ने सभी तारीखे ,प्रसंगों के साथ सिलसिलेवार दुहरायी |
“she” ने पूरी ताकत से मुस्कान ओढ़ने की कोशिश की और धीरे से कहा ...
“डार्लिंग जो सहता है सिर्फ उसे ही याद रहता है |”
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खेल खत्म होने के पहले सिरहाने रखे फूल मुरझा चुके थे और केक पर सजी मोमबत्तियां धुआँ छोड़ रहीं थी |||

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