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schizophrenia

सीजोफ्रेनिक प्रेमकहानी 

इस कहानी में ,
कोई हनी बनी नहीं है ,
कोई पम्पकिन भी नहीं है |
बस एक डोर है वो भी अनसुलझी हुई |
डोर के एक सिरे पर ,
अगली बेंच पर एक लडकी है ,पोलका डॉट का स्कार्फ पहने |
दूसरे सिरे पर ,
पिछली बेंच पर एक लड़का है ,बंद गले का फुलोवर पहने हुए |
बीच में गुत्थी है बुरी तरह उलझी हुई |
कि  क्यों लड़की दो दाँतों के बीच से हँसती हुई, 
बात बेबात बार बार पीछे पलटकर देखती है ?
और क्यों इसके बाद लड़के के लिए पोलका डॉट झिलमिल सितारों में बदल जाते हैं |
गुत्थी सुलझती कि उसके पहले ,
गुबार का गुब्बारा उठकर सितारों पर छा जाता है |
बाप की बीमारी लड़के को कालेज की बेंच से
दुकान के काउंटर खीच ले जाती है |...
कई सालो बाद...
लड़के को एक तस्वीर मिलती है
जिसमे लड़की पोलका डॉट वाला स्कार्फ पहने हुए है |
लड़का काउंटर के सामने, दीवार पर पलट कर उस तस्वीर को टांग देता है |
और इंतज़ार करता है कि कब लड़की तस्वीर से निकलेगी और पलट कर देखेगी |
कहते है कि लड़के का इंतज़ार अब भी जारी है |||




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