जंगल राज़
पर एक दिन उसका
बाप हिरसा टंगिया लेकर दौड़ पड़ा..
साहेब मौके की
ताक में बैठ गया |
मौका उस दिन
मिला जब विज्जू लकड़ी चुराकर शहर ले जाते पकड़ा गया |
साहेब ने कहा
विज्जू आज चुंगी नहीं गवाही लगेगी |
लकड़ी भी थी
गवाही भी थी और मुजरिम भी था |
हिरसा का चालान
कट गया और वो पिछले ६ महीने से बड़े घर का मेहमान है |
साहेब ६ महीने
से भुइयाँ के साथ उसे बाहर निकालने का सौदा कर रहे है |
सौदा अब तक पटा नहीं है
क्योंकि भुइयाँ
का भरोसा अभी भी टंगिया पर कायम है ||||
( चित्र : जोहन जोर्गिंसों गूगल साभार )

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