
सूक्ष्म कथा: ज़ख़्म
एक मोहल्ले के गुस्साये लोगों ने दूसरे
मोहल्ले पर पथराव कर दिया |
दूसरे मोहल्ले के गुमराह लोगों ने पहले
मोहल्ले की दुकानों में आग लगा दी |
ये सारा कुछ ,कुछ मिनट में ही हो गया |
जिस पर दमकल की गाड़ियों ने कुछ घंटो में
काबू पा लिया
फिर व्यवस्था बहाल करने के लिए कर्फ्यू
लगा दिया गया |
कुछ दिनों बाद व्यवस्था बहाल होते ही
कर्फ्यू हटा लिया गया |
कुछ हफ़्तों में हादसे से आये ज़ख़्म भी भर
गये |
कुछ महीनों बाद
पथराव से अफाहिज व्यक्ति के लड़के को स्कूल छोडकर स्कूल के आगे ठेला लगाना पड़ गया |
दूकान की तबाही से उबर पाने में नाकामयाब
एक ने हताशा में पुल से छलांग लगा दी |
जो मजदूर दंगे के बाद घर नहीं लौटा, उसकी बीबी
दुधमुहे बच्चे के साथ बदनाम गलियों में देखी जाने लगी |
बरसों बाद दोनों मोहल्ले के लोग आज भी जब आमने
सामने होते हैं तो पुराने ज़ख्म हरे होकर रिसने लगते हैं |
इस
जख्मों को ठीक होने में कितना वक्त लगेगा कौन जाने ??????
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