Skip to main content

कानून कथा / इंसाफ/ मुआवजा


 कानून कथा
उन्होंने कानून बनाया
क़ानून के हाथ बनाये कि अपराधी पहुँच से बच ना पाये |
हाथ ज़रा लंबे बनाये कि अपराधी तेज और चालक होते हैं 
ज़रा और लंबे किये कि कुछ अपराधी दूर देश में बैठे होते हैं |
 फिर ज़रा और लंबे किये कि कुछ अपराधी ऊँची कुर्सी पर होते हैं |
.........लंबे  होते होते हाथ इस क़दर लंबे हो गए कि आपस में उलझ गए |
अब अपराधी पास में खड़े हँस रहे हैं और कानून अपने हाथ सुलझाने में लगा है |
@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@
इंसाफ 
सबसे खोखला लेकिन सबसे ज्यादा बजने वाली चीज क्या है ???
इन्साफ
मुहर लगे कागज पर थूकते हुए उसने कहा ||||
@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@
मुआवजा 
 पहला सरकारी लारी में दबकर एक मरा : मुआवजा १ लाख
दूसरा ट्रेन के ए. सी . डिब्बे के नदी में गिरने से मरा : मुआवजा ५० लाख
तीसरा हवाई जहाज़ क्रेश होने में मरा : मुआवजा १० करोड़
ये कैसा इन्साफ है ?
 जान तो सबकी बराबर है |कोई चिल्लाया ....
नहीं आमदनी में फर्क था  जान की कीमत आमदनी से तय होती है |
पहला जो मजूर था, कमाता तो हड्डी तोड़ था लेकिन सिर्फ २ हज़ार महीना |
दूसरा सरकारी अफसर था |कमीशन से कमाई थी १ लाख महीना
तीसरे के साथ हम चाहकर भी इन्साफ नहीं कर सके , जो देश का नेता था |घोटालों के मौसम में उसकी कमाई करोड़ों में थी लेकिन हमारी लिमिट में बस इतना ही दिया जा सकता था | हम उनके परिवार के सदस्यों से क्षमा याचना करते हैं |
उन्होंने कहा और  आँखें मूँद ली |||

Comments

Popular posts from this blog

तहखाना और राजयोग

तहखाना इस तयखाने की जानकारी में सिर्फ साहब और उनके चार सिपहसलार को ही   हैं | छटवां सिर्फ   मैं हूँ | साहब   के इस   तहखाने   में ऐसे ऐसे   राज़ हैं कि बाहर आ   जायें तो   हंगामा हो   जाये | आप   पूछे इसके पहले मै आपको बता   दूँ   कि मै आपको   कुछ   बता नहीं सकता सिर्फ दिखा सकता   हूँ वो भी अपने उन   इशारों से जिन्हें   आप   पढने   की योग्यता   शायद   नहीं   रखते | दरअसल मुझे इस विशेष तहखाने तक पहुँचने के अवसर की    योग्यता   अपनी सिर्फ एक   जन्मजात अयोग्यता के   कारण हासिल   हो सकी है और वो है   मेरा   जन्मजात   गूंगा और अनपढ़ होना | ना बोल सकता   ना लिख सकता इसलिए कोई खतरा   ना   समझकर साहब ने तहखाने में होने वाली गप्त वार्ताओं के समय   अपनी और मंडली की   सेवा के लिए   मेरा   चयन   किया | बोतल , सोडा , चखना , सिगरेट और खाना   परोसने भर तक मुझे वहां   रहने   की ...

कथा :राखी और कवच

कथा : राखी +++++++++++++++++ आज के दिन जब दीदी की कलाई पर राखी बांधता हूँ और उससे रक्षा का वचन लेता हूँ तो लोग कहते हैं कि मै गलत परम्परा डाल रहा हूँ..| मै कहता हूँ नही ..बस परम्परा को सही कर रहा हूँ | मेरी बात समझने के लिए आपको मेरे बचपन में जाना होगा | हम पांच थे .. माँ ,बाबू, दीदी मैं और सिम्मो | कस्बे में घर के बाहरी कमरे में ही हमारी प्रेस की दूकान थी .. माँ पड़ोस से कपड़े लाती और बाबू मुंह में बीड़ी दबाये कपड़ो पर कोयले वाला प्रेस फेरते | बीड़ी की लत ने बाबू को जवानी में ही इतना बेदम कर दिया कि अब वे सिर्फ प्रेस में कोयला भर पाते और प्रेस फेरने का काम दीदी के जिम्मे आ गया | दीदी दिन भर काली चाय पीती और प्रेस करती | हाँ मुझसे और सिम्मो से जरुर कहती दूध पीया करो ..कमज़ोर दिखते हो | मेरे कालेज पहुँचते पहुँचते जब बाबू सिर्फ दवा के भरोसे रह गये तब दीदी ने बाबू की जगह ले ली | दीदी अब प्रेस के साथ हमारी पढ़ाई लिखाई के बारे में भी पूछती | जबरिया जेब में नोट डालकर सर पर हाथ फेरते हुए कहती चिंता मत कर खूब पढ़ | मेरा कालेज खत्म भी नहीं हुआ था.. कि सिम्मो कस्बे के ऑटो वाले के साथ भाग गयी | मैने अपन...

दुम और जंगल

सूक्ष्म कथा : दुम और जंगल;  ************************** ********* १) दुम +++++++ मै दम लाने के चक्कर में दुम काट दिया करता था| ' लेकिन हमें हिलती हुई दुम पसंद है' मेरी रचनाओ के पढ़ने के बाद कड़वा सा मुंह बनाते हुए सम्पादक महोदय में प्रकाशक की ओर ठेल दिया | प्रकाशक पान की पीक के साथ उन पर कुछ थूकने जा ही रहे थे कि मैं उन्हें समेटकर तेज़ी से उठा | उतनी ही तेज़ी से "वे" अन्दर आये और अपने झोले से लम्बी दुमो को निकालकर टेबल पर उनके सामने फैलाकर बैठ गये | कुछ सालों बाद "वे" सम्पादक की कुर्सी पर विराजमान थे ||| २)जंगल +++++++++ उनके शहर जाना हुआ | वे बोले ' चलिये आज जंगल पिकनिक कर आते हैं |' घंटो कार से भटकने के बाद शहर के मुख्यमार्ग से हटकर झाड़ियों की आड़ थी जिसे शायद आसपास केगाँव वालों ने दिव्यनिपटान के लिए बचा कर रखा होगा | हम वहां अपने साथ ले जाये गये टिफिन खाली करके सेल्फी लेकर लौट आये | रात उनके घर डिनर पर जाना हुआ| तीन लोंगो के लिए ६ बेडरूम के उस घर में दरवाजे खिड़की फलोरिंग बेड ड्रेसिंग डाइनिंग काउच सोफा सब का सब शानदार वुडन क्राफ्ट था | जिसकी खासियत वे ग...