उन्होंने कानून
बनाया
क़ानून के हाथ
बनाये कि अपराधी पहुँच से बच ना पाये |
हाथ ज़रा लंबे
बनाये कि अपराधी तेज और चालक होते हैं
ज़रा और लंबे
किये कि कुछ अपराधी दूर देश में बैठे होते हैं |
फिर ज़रा और लंबे किये कि कुछ अपराधी ऊँची कुर्सी
पर होते हैं |
.........लंबे होते होते हाथ इस क़दर लंबे हो गए कि आपस में
उलझ गए |
अब अपराधी पास
में खड़े हँस रहे हैं और कानून अपने हाथ सुलझाने में लगा है |
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इंसाफ
सबसे खोखला
लेकिन सबसे ज्यादा बजने वाली चीज क्या है ???
‘इन्साफ’
मुहर लगे कागज
पर थूकते हुए उसने कहा ||||
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मुआवजा
पहला सरकारी लारी
में दबकर एक मरा : मुआवजा १ लाख
दूसरा ट्रेन के ए. सी . डिब्बे के नदी में गिरने से मरा :
मुआवजा ५० लाख
तीसरा हवाई जहाज़ क्रेश होने में मरा : मुआवजा १० करोड़
ये कैसा इन्साफ है ?
जान तो सबकी बराबर
है |कोई चिल्लाया ....
“नहीं आमदनी में फर्क था जान की कीमत आमदनी से तय होती है |
पहला जो मजूर था, कमाता तो हड्डी तोड़ था लेकिन सिर्फ २ हज़ार
महीना |
दूसरा सरकारी अफसर था |कमीशन से कमाई थी १ लाख महीना
तीसरे के साथ हम चाहकर भी इन्साफ नहीं कर सके , जो देश का
नेता था |घोटालों के मौसम में उसकी कमाई करोड़ों में थी लेकिन हमारी लिमिट में बस
इतना ही दिया जा सकता था | हम उनके परिवार के सदस्यों से क्षमा याचना करते हैं |”
उन्होंने कहा और
आँखें मूँद ली |||

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