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अमर/ मलबा/ पर्यावरण

३ सूक्ष्म कथाएँ
अमर 
उसे छत से धकेला गया ,वो नहीं मरा
उसे चौथे माले से लात मारी गयी वो नहीं मरा
उसे मोबाईल टावर से फेका गया तब भी वह बचा रहा
अब कैसा भी  पतन  उसके लिए बेमानी हो चुका था
दरअसल जब वह अपनी निगाहों से गिरा और नहीं मरा
तबसे वो अमर हो चुका था .......|||
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मलबा 

खँडहर के आसपास से गुजरते लोगो को इसका कोई इल्म ना था |
ना कभी होता | लेकिन जब  बारिश में मलबा जमीन पर आ गया तो उसे हटाना मज़बूरी हो गयी | और तभी वह  काफी हॉउस प्रकट  हुआ जिसके वेटर और  ग्राहक जा चुके थे | दरवाज़े पर ताले पड़े थे | लेकिन जिसकी टेबल के चौगिर्द गर्द में गर्क  ४ लोग अभी भी बदलाव पर बहस कर रहे थे | इस बीच सिर्फ इतना बदलाव हुआ था कि उनके दाँत और बाल झड गए थे | चेहरे पर झुर्रियों टंग चुकी थी और वे जीवाश्म में बदल चुके  थे |||||
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पर्यावरण 
संस्था को अहसास हुआ कि पर्यावरण खतरे में है | पेड़ बचाये जायें |
१०००       पेड़ काटे गये | १००००० किताबे छापी गयीं | १००००००० करोड़ पन्नों पर
लिखा गया ..... पेड़ बचायें.... पेड़ बचायें.... पेड़ बचायें.... पेड़ बचायें.... पेड़ बचायें.... पेड़ बचायें....||||
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