..सूक्ष्म कथा :कब्रस्तान
...वो ३० साल बाद अपने बचपन के शहर में था.. घर से स्कूल के रास्ते पर जहाँ उसने घरौंदे बनाये थे, वहाँ मल्टी स्टोरी इमारत उग आयी थी |
जो टीला पहाड़ लगता था फ्लाई ओवर के नीचे दफ़न हो चुका था |
इमली का पेड़ जिसके नीचे हाट लगती थी वहाँ अब मॉल था |
चलते चलते वो कब्रस्तान के सामने जा पहुँचा |वहाँ भी कच्ची कब्रें पक्की हो चुकी थीं और पक्की कब्रों पर संगमरमर जड़े जा चुके थे |
तभी उसने देखा कि कब्रिस्तान के पीछे जहाँ मरे जानवर फेंके जाते थे वहाँ एक बड़ी सी झुग्गी बस गयी थी जिसके बजबजाते बदबूदार गटर के किनारे नाक और लार बहाते बच्चे खेल रहे थे |
उसने पाया कि बचपन से अब तक ... शहर का विकास तो खूब हुआ था लेकिन कब्रिस्तान के पास पहुँचकर दम तोड़ गया था |
तभी उसने देखा कि कब्रिस्तान के पीछे जहाँ मरे जानवर फेंके जाते थे वहाँ एक बड़ी सी झुग्गी बस गयी थी जिसके बजबजाते बदबूदार गटर के किनारे नाक और लार बहाते बच्चे खेल रहे थे |
उसने पाया कि बचपन से अब तक ... शहर का विकास तो खूब हुआ था लेकिन कब्रिस्तान के पास पहुँचकर दम तोड़ गया था |
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