सूक्ष्म कथा :
बात इतनी सी थी कि कोई बात ही ना थी |
तुम चाहती थी कि मै गोभी चिल्ली खाकर
तुम्हे मोहब्बत का सबूत दूं |
मै चाहता था कि तुम आलू दम बनाकर मुझे
इज्ज़त दो |
हम भूल गए थे कि रिश्ते में गलतफहमी
जितनी तेज़ी से पनपती है , कैंसर की गाँठ भी उतनी तेज़ी से नहीं बढती |
और फिर रिश्ते में आज़माइश का वो खेल फिर शुरू हो गया , जिसे
ना खेलने की कसम कई दफे हम खा चुके थे |
बच्चे इस खेल के खत्म होने का इंतज़ार
करते करते वक़्त से पहले बूढ़े हो गये |
हम उनके आँसुओं को देख पाते तो शायद समझ
पाते
कि जो गाँठ हमने बड़े होकर लगायी थी

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