सूक्ष्म कथा : खेल और जुर्म
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( वो खेलें तो खेल ....
हम खेलें तो जुर्म ..जुआ ..सज़ा कैदे बामुश्क्कत
)
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............“ दीपावली से जुड़ी सामाजिक बुराई के उन्मूलन के लिए साहेब बहादुर के निर्देशन में रिक्शा स्टेंड , धर्मशाला और
फुटपाथिया होटल में छापामार कार्यवाही करते हुए ७४० जुआरी पकड़े और फड़ से ५६ हज़ार
रूपये ज़ब्त कर सरकारी खजाने में ज़मा किये गये|”
......दीपावली की अगली भोर सुबह की सैर
के दौरान जो मैंने देखा था उसे मैंने बाक्स न्यूज बनाना चाहा ...
मैंने देखा था कि ऑफिसर क्लब के अंदर से ४ तुर्रा धारी ,लड़खड़ाते साहेब बहादुर को सहारा देकर लाये और उन्हें फोर्ड गाड़ी में
डाल दिया |
.....दरबान ने बताया कि साहेब बहादुर दोस्तों के साथ रात भर लक्ष्मी जागते रहे और बोतल नचाते रहे
..हुज़ूर शुरू में तो जीते पर बाद में अंगूठी तक हार गये ...
इस न्यूज पर संपादक ने लाल लाइन
मार दी |
( चित्र : टेंगेंटोप्पा)

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