सूक्ष्म कथा : साहेब सलाम
साहेब सलाम शिकार के लिये जंगल गये और
वहाँ से सुन्दर मैना पकड़ लाये |
नाम रखा ‘राधा’|
राधा ने उड़ना चाहा तो पंख काट डाले |
चोच चुभी तो उसे घिस डाला |
पर राधा को प्रेम और आजादी भरपूर दी |
राधा बड़ी सी हवेली में दिन भर चक्कर
काटती रहती |
हवेली में साहेब सलाम का वफादार ‘शेरा’ भी था |
एक दिन जायका बदलने के लिये शेरा ने राधा पर झपट्टा मार दिया |
एक दिन जायका बदलने के लिये शेरा ने राधा पर झपट्टा मार दिया |
साहेब सलाम ने देखा तो..लपककर दुनाली दाग दी |
एक चीख के साथ शेरा उछलकर तड़पा और ठंडा
हो गया |
साहेब सलाम भी सर पकड़कर बैठ गये |
उन्हें वफादार शेरा के जाने का पछतावा तो
बहुत था |
पर उन्होंने सोचा कि सबल से निबल की
रक्षा ही उनका धर्मं है |
वे ‘साहेब सलाम’ जो ठहरे ||||

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